
नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को नई दिल्ली में कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक सम्मेलन (जीसीडब्ल्यूएएस-2026) के उद्घाटन सत्र में शिरकत की और सत्र को संबोधित किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि बुवाई, कटाई, प्रसंस्करण और फसलों को बाजार तक पहुंचाने सहित कृषि संबंधी सभी गतिविधियों में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, पशुपालन, वन उत्पादों के समुचित इस्तेमाल और कृषि आधारित उद्यमों के संचालन सहित कई क्षेत्रों में अथक परिश्रम करती हैं। कृषि अर्थव्यवस्था में महिलाओं का अमूल्य योगदान है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों में कुल छात्रों में 50 प्रतिशत से अधिक लड़कियां हैं और कई विश्वविद्यालयों में यह संख्या 60 प्रतिशत से अधिक है। ये लड़कियां शैक्षणिक दृष्टि से भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सरकार, समाज और कृषि क्षेत्र के सभी हितधारकों का यह दायित्व है कि वे इन होनहार लड़कियों को कृषि तथा अनाज उत्पादन के क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान करने के लिए हर संभव सहायता और प्रोत्साहन दें। उन्होंने कहा कि नेतृत्व मातृत्व का अंतर्निहित गुण है। हालांकि, मातृत्व को अक्सर घर की चारदीवारी तक ही सीमित माना जाता है। हमें इस मानसिकता को दूर करना होगा और महिला किसानों को नेतृत्व प्रदान करने के लिए सशक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2026 को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष’ घोषित किया है। इस घोषणा में कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं में महिला-पुरुष आधारित असमानताओं को दूर करने और महिलाओं के लिए नेतृत्व की भूमिकाओं को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया गया है।
