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उपराष्ट्रपति की मौजूदगी में डीयू में ‘ड्रग फ्री कैंपस अभियान’ की शुरुआत

Jan 13, 2026

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय ने नशा मुक्त बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मंगलवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान व देश के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन इस विषय को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय में मौजूद रहे। यहां उपराष्ट्रपति ने कहा कि सशक्त राष्ट्र के लिए सशक्त नेतृत्व आवश्यक है और विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक ज्ञान के केंद्र नहीं, बल्कि ऐसे संस्थान हैं जहां मूल्य गढ़े जाते हैं, नेतृत्व विकसित होता है और राष्ट्र का भविष्य आकार लेता है। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली विश्वविद्यालय जैसा प्रतिष्ठित संस्थान नशे के विरुद्ध सख्त रुख अपनाता है, तो यह पूरे समाज को एक सशक्त संदेश देता है। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने ‘नशा मुक्त परिसर अभियान’ के अंतर्गत एक समर्पित ई-प्रतिज्ञा मंच और मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ किया। उन्होंने देशभर के विश्वविद्यालयों के छात्रों से अपील की कि वे इस मंच के माध्यम से नशा मुक्त परिसर की शपथ लें और अभियान को जन-आंदोलन का रूप दें। इससे पहले उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को दिल्ली विश्वविद्यालय में ड्रग फ्री कैंपस अभियान का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए सतत, सामूहिक और राष्ट्रव्यापी प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नशा मुक्त युवा ही विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की आधारशिला हैं। उपराष्ट्रपति ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से आग्रह किया कि ड्रग फ्री कैंपस अभियान को सभी केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए। नशा केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौती है। भारत एक युवा राष्ट्र है और ऐसे में मादक पदार्थों का दुरुपयोग केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक चुनौती है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट और जनसांख्यिकीय लाभांश के लिए खतरा है। उन्होंने चेतावनी दी कि नशा शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक प्रदर्शन, पारिवारिक सौहार्द, उत्पादकता और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी प्रभावित करता है, विशेषकर इसके नार्को-आतंकवाद से जुड़े संबंधों के कारण। विकसित और आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार हो सकता है, जब युवा स्वस्थ, नशा मुक्त और उद्देश्यपूर्ण जीवन जियें। नशा मुक्त युवा कौशल विकास, उद्यमिता को बढ़ावा देने और राष्ट्र के आर्थिक विकास में सार्थक योगदान देने में सक्षम होते हैं। उपराष्ट्रपति ने यहां भारत की प्राचीन परंपराओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में आत्मसंयम, मानसिक संतुलन और मन व शरीर की शुद्धता को अत्यंत महत्व दिया गया है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ध्यान और योग को प्रोत्साहित करने की पहल से भी जोड़ा। उन्होंने माई भारत पोर्टल और प्रधानमंत्री अनुसंधान योजना जैसी पहलों का उल्लेख किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इसी समग्र दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य, जीवन कौशल और छात्र कल्याण पर विशेष जोर दिया गया है। ड्रग फ्री कैंपस अभियान इस नीति की भावना के अनुरूप सुरक्षित, समावेशी और पोषक शैक्षणिक वातावरण के निर्माण में सहायक है। उन्होंने छात्रों से सतर्क रहने और संकट में फंसे साथियों की सहायता करने का आह्वान किया। विश्वविद्यालय की प्रशंसा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि जागरूकता, परामर्श, छात्र-नेतृत्व वाली पहल और विभिन्न हितधारकों के सहयोग को एकीकृत करना एक प्रशंसनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि जब छात्र परिवर्तन के दूत बनते हैं, तो उसका प्रभाव केवल विश्वविद्यालय परिसरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवारों और समाज तक फैलता है। उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि दिल्ली विश्वविद्यालय एक आदर्श नशा मुक्त परिसर के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि नशा मुक्त भारत ही एक स्वस्थ, सशक्त और विकसित राष्ट्र के लक्ष्य को प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।