
नई दिल्ली: देश के प्रमुख बंदरगाहों ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं, जिनसे कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आई है। “हरित सागर” ग्रीन पोर्ट दिशानिर्देशों के तहत बंदरगाहों पर हरित तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन्हीं प्रयासों के तहत ग्रीन टग ट्रांजिशन प्रोग्राम (जीटीटीपी) लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक डीजल से चलने वाले टग्स को इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड टग्स में परिवर्तित करना है। इसके अलावा बंदरगाहों पर नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, उपकरणों, वाहनों और रेलवे ट्रैकों का विद्युतीकरण, शून्य-उत्सर्जन ट्रकों की तैनाती और ऑनशोर पावर सप्लाई सिस्टम की स्थापना जैसे कदम भी उठाए गए हैं। इन पहलों के चलते प्रमुख बंदरगाहों की कार्बन तीव्रता में कमी दर्ज की गई है। जीटीटीपी के तहत चार प्रमुख बंदरगाह-दीनदयाल पोर्ट, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, विशाखापत्तनम पोर्ट और वीओ चिदंबरनार पोर्ट ने इलेक्ट्रिक टग्स के लिए कार्यादेश जारी कर दिए हैं। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत देश में हरित हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में सहयोग के लिए तीन प्रमुख बंदरगाहों, गुजरात के दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण, ओडिशा के पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण और तमिलनाडु के वीओ चिदंबरनार बंदरगाह प्राधिकरण को हरित हाइड्रोजन हब के रूप में मान्यता दी है। इन बंदरगाहों द्वारा हरित हाइड्रोजन हब के रूप में विकसित किए जाने के लिए उठाए जा रहे हैं। सभी प्रमुख बंदरगाह छोटे जलयानों जैसे कि पोर्ट क्राफ्ट को ‘तट से जहाज तक विद्युत आपूर्ति’ की सुविधा प्रदान कर रहे हैं।
