
ईरान और अमेरिका एक बार फिर बातचीत के लिए तैयार नजर आ रहे हैं, हालांकि इस बार वे सीधे नहीं बल्कि दूरी बनाए रखते हुए और दूसरे स्तर के प्रतिनिधियों के जरिए संवाद कर सकते हैं। ईरान से एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच चुका है, जबकि अमेरिकी दल के शनिवार को वहां पहुंचने की उम्मीद है।
ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत में शामिल होने से मना कर दिया था, जिसकी वजह से पिछले हफ्ते दोनों पक्षों के बीच दूसरे राउंड की वार्ता नहीं हो पाई। हालांकि, बाद में ईरान ने फिर से बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश की।
एक तरफ भीषण तनाव की वजह से तेहरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है और दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान के पोर्ट को ब्लॉक कर दिया है।
वैसे तो दोनों पक्षों के बीच सीजफायर को लेकर हलचल देखने को मिल रही है, लेकिन इस बीच में अमेरिका ने ईरानी जहाजों पर हमला करके कब्जा कर लिया है। वहीं, तेहरान ने भी जहाजों पर हमला करके उन्हें कब्जा कर लिया है। ईरान ने जिन जहाजों पर कब्जा किया है, उनमें दुबई से भारत जा रहा एक जहाज भी शामिल है।
ईरान ने नाकाबंदी के दौरान अमेरिका के साथ बातचीत करने से मना कर दिया था, हालांकि सीजफायर के मुद्दे पर बातचीत करने के लिए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंचे। ऐसा कहा जा रहा है कि यह पाकिस्तान, ओमान और रूस के साथ बातचीत के एक दौर का हिस्सा है।
दूसरी तरफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और खास दूत स्टीव विटकॉफ भी इस्लामाबाद पहुंचेंगे। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने उनके बीच सीधी मीटिंग से मना कर दिया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक्स पर बघाई ने लिखा, “ईरान और अमेरिका के बीच कोई मीटिंग होने का प्लान नहीं है। ईरान के ऑब्जर्वेशन पाकिस्तान को बताए जाएंगे।”
इसका मतलब है कि अमेरिका के साथ सीधी बातचीत के बजाय, ईरान अपना पक्ष पाकिस्तान को बताएगा और दोनों पक्ष पाकिस्तानी बिचौलियों के जरिए बातचीत कर सकते हैं।
