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होर्मुज संकट पर सक्रिय हुआ फ्रांस, राष्ट्रपति मैक्रों ने की ईरानी राष्ट्रपति से बात, स्ट्रेट को तत्काल खोलने का आग्रह

May 7, 2026

पेरिस: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ बातचीत के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सभी पक्षों से होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी को बिना किसी देरी और बिना किसी शर्त के हटाने का आह्वान किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “मैंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से बात की है। मैंने बढ़ते तनाव पर अपनी गहरी चिंता जाहिर की और यूएई के नागरिक बुनियादी ढांचे व कई जहाजों पर किए गए अनुचित हमलों की निंदा की।”

उन्होंने लिखा, “सभी पक्षों को स्ट्रेट से बिना देरी और बिना किसी शर्त के हटा देना चाहिए। हमें स्थायी रूप से उस व्यवस्था को बहाल करना होगा, जिसमें संघर्ष से पहले नौवहन की पूर्ण स्वतंत्रता सुनिश्चित थी। फ्रांस और ब्रिटेन का बनाया बहुराष्ट्रीय मिशन जहाज मालिकों और बीमा कंपनियों के बीच भरोसा वापस लाने में मदद कर सकता है। यह मिशन स्वाभाविक रूप से युद्ध में शामिल पक्षों से अलग होगा। एयरक्राफ्ट कैरियर ‘चार्ल्स डी गॉल’ का आगे तैनात होना इस मामले में फिट बैठता है।”

राष्ट्रपति मैक्रों ने पोस्ट किया, “हाल की घटनाओं से ऐसे मिशन की उपयोगिता साफ तौर पर पता चलती है। मैंने ईरानी राष्ट्रपति से इस मौके का फायदा उठाने की गुजारिश की है और मैं इस मामले पर राष्ट्रपति ट्रंप से भी बातचीत करने वाला हूं। स्ट्रेट में शांति की बहाली परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मुद्दों और क्षेत्रीय स्थिति पर चल रही वार्ताओं को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। प्रतिबंध हटाने में जिन यूरोपीय देशों की महत्वपूर्ण भूमिका है, वे इसमें अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।”

राष्ट्रपति मैक्रों और ईरानी राष्ट्रपति के बीच यह वार्ता ऐसे समय में हुई है, जब ‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका और ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौते के करीब पहुंच चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, संभावित समझौते में ईरान परमाणु संवर्धन पर रोक लगाने के लिए सहमत हो सकता है, जबकि अमेरिका प्रतिबंध हटाने पर राजी हो सकता है। साथ ही दोनों पक्ष होर्मुज स्ट्रेट आवाजाही पर लगी पाबंदियां हटाएंगे।

बता दें कि ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच 8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ था। इससे पहले 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद 40 दिनों तक संघर्ष चला था। युद्धविराम के बाद ईरान और अमेरिका ने 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान में शांति वार्ता का एक दौर आयोजित किया, लेकिन इससे कोई समझौता नहीं हो सका। पिछले कुछ हफ्तों में दोनों पक्षों ने युद्ध समाप्त करने के लिए कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया है, जिनमें नए प्रस्ताव पर फिलहाल ईरान विचार कर रहा है।