
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐसा फैसला सुनाया जिसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आर्थिक एजेंडे की नींव हिला दी. कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप द्वारा लगाए गए वैश्विक रेसिप्रोकल टैरिफ को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया. मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स की अगुवाई वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने की शक्ति केवल संसद (कांग्रेस) के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं. कोर्ट फैसले के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह निर्णय बेहद निराशाजनक है और वह कोर्ट के कुछ सदस्यों से शर्मिंदा हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट विदेशी ताकतों के आगे झुक गई है. उन्होंने यह भी दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनकी शक्ति को कम नहीं बल्कि और अधिक मजबूत बनाता है. उन्होंने अतिरिक्त 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ का भी ऐलान किया है. भले ही सुप्रीम कोर्ट ने 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ को असंवैधानिक बताया हो, लेकिन इससे ट्रंप के सभी विकल्प समाप्त नहीं हुए हैं. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति के पास अभी भी कई वैधानिक प्रावधान मौजूद हैं, जिनके जरिए वे आयात पर शुल्क बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं.
