
नई दिल्ली: भारत दुनिया का एक बड़ा मेडिसिन सप्लायर जरूर है लेकिन हाई-एंड ड्रग इनोवेशन और ओरिजिनल रिसर्च के क्षेत्र में, अभी भी दूसरो पर निर्भरता दिखाई देती है। यह बात सोमवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कही।
उन्होंने कहा, “इसलिए यह समय है, कि हम जेनरिक प्रोडक्शन से आगे बढ़कर, इनोवेशन पर केंद्रित फार्मास्युटिकल इकोसिस्टम की ओर अपना ध्यान केंद्रित करें।”
रक्षामंत्री सोमवार को आरआर हॉस्पिटल नई दिल्ली में आर्मी मेडिकल कॉर्प्स रेजिंग डे के अवसर पर बोल रहे थे। रक्षामंत्री ने कहा कि जब भी इस दौर में हम सुरक्षा की बात करते हैं, तो उसमें केवल सीमाओं की रक्षा शामिल नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अगर हम ऑपरेशन सिंदूर जैसे बड़े ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देते हैं, तो उसके पीछे स्वास्थ्य सुरक्षा की एक बड़ी भूमिका होती है।
रक्षामंत्री ने कहा कि हमें नई दवाओं की खोज, क्लीनिकल रिसर्च को मजबूत करने और ग्लोबल क्वालिटी स्टैंडर्ड को अपनाने पर भी ध्यान देना होगा। एमएसएमई और स्टार्टअप को फार्मा इनोवेशन में जोड़ना, बेहतर टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना और कुशल मैनपॉवर तैयार करना भी जरूरी है। इससे न केवल घरेलू जरूरतें पूरी होंगी बल्कि भारत वैश्विक स्तर पर इन क्षेत्रों में एक लीडर के रूप में भी उभरेगा। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब दुनिया तेजी से बदल रही है, तो डिफेंस और हेल्थकेयर, दोनों क्षेत्रों में भी हमें उतनी ही तेज गति से आगे बढ़ना होगा।
