
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि 2023 में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया था, तब सभी राजनीतिक दलों ने मिलकर इसे सर्वसम्मति से पारित किया था। उस समय एक सुर में यह भी मांग उठी थी कि इस कानून को हर हाल में 2029 तक लागू किया जाए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बार भी सरकार की प्राथमिकता यही है कि सभी जरूरी फैसले संवाद, सहयोग और सहभागिता के जरिए लिए जाएं। उन्हें विश्वास है कि जिस तरह पहले इस अधिनियम ने संसद की गरिमा बढ़ाई थी, उसी तरह इस बार भी सामूहिक प्रयास से संसद नई ऊंचाइयों को छुएगी।
पीएम मोदी ने देश में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि आज भारत में राष्ट्रपति से लेकर वित्त मंत्री जैसे अहम पद महिलाओं के पास हैं और वे इन जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं। इससे देश का गौरव लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी को भी एक बड़ा उदाहरण बताया और कहा कि आज देश में 14 लाख से अधिक महिलाएं लोकल गवर्नमेंट बॉडीज में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। करीब 21 राज्यों में पंचायतों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लाखों महिलाओं की यह सक्रियता दुनियाभर के बड़े नेताओं और राजनीतिक विशेषज्ञों को भी हैरान करती है। कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि जब निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है, तो सिस्टम अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनता है। जल जीवन मिशन की सफलता इसका एक उदाहरण है, जहां पंचायत स्तर पर महिलाओं की अहम भूमिका रही है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि आज देश की बेटियां नए-नए बिजनेस में अपनी पहचान बना रही हैं। मुद्रा योजना के तहत दिए गए कुल लोन में से 60 प्रतिशत से अधिक लोन महिलाओं ने लिए हैं। वहीं, देश के स्टार्टअप रिवोल्यूशन में भी महिलाएं आगे हैं। वर्तमान में 42 प्रतिशत से ज्यादा रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला डायरेक्टर है।
स्किल इंडिया मिशन का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि कुछ साल पहले शुरू किए गए व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का असर अब दिखने लगा है। ड्रोन दीदी जैसी पहल के जरिए महिलाएं कृषि क्षेत्र में नई क्रांति ला रही हैं।
