
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। संसद के विशेष सत्र में तीन विधेयकों को लेकर जारी बहस के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दक्षिण भारत के राज्यों के प्रतिनिधित्व में कमी आने की आशंकाओं को सिरे से खारिज किया। उन्होंने लोकसभा में स्पष्ट किया कि यह एक भ्रामक नैरेटिव है और प्रस्तावित बदलावों के बाद दक्षिणी राज्यों की ताकत घटने के बजाय बढ़ेगी।
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि यह धारणा बनाई जा रही है कि इन विधेयकों के लागू होने से दक्षिण भारत की लोकसभा में हिस्सेदारी कम हो जाएगी, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी भी क्षेत्र को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि जनसंख्या के आधार पर संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
गृह मंत्री ने संभावित परिसीमन के बाद सीटों में होने वाली वृद्धि के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि कर्नाटक में वर्तमान 28 सीटें बढ़कर 42 होंगी। इसी तरह, आंध्र प्रदेश में 25 से बढ़कर 38 सीटें होंगी, और तेलंगाना में 17 से बढ़कर 26 सीटें होंगी।
तमिलनाडु और केरल को लेकर आश्वासन देते हुए गृह मंत्री शाह ने कहा कि तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59 होंगी और केरल की सीटें 20 से बढ़कर 30 होंगी। उन्होंने आगे कहा कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि परिसीमन के बाद दक्षिण भारत की राजनीतिक शक्ति में वृद्धि होगी, न कि कमी।
गृह मंत्री के अनुसार, वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटों में दक्षिणी राज्यों के 129 सांसद हैं। प्रस्तावित वृद्धि के बाद यह संख्या बढ़कर 195 तक पहुंच सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इससे दक्षिण भारत की आवाज संसद में और मजबूत होगी। अमित शाह ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और इसमें किसी भी राज्य या क्षेत्र के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह लोगों के बीच भ्रम फैलाकर राजनीतिक लाभ लेना चाहता है।
गृह मंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि जो लोग यह कह रहे हैं ये बिल सत्ता की लालसा में लाया गया है, वो हमारी शक्ति ज्यादा मान रहे हैं। 130 करोड़ लोगों के मत को कौन अपने हिसाब से बदल सकता है और अगर कर पाते तो हम तो जीत ही नहीं पाते हम तो विपक्ष में बैठे थे। जनमत को अपने हिसाब से नहीं बदला जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र को इस देश से कोई खत्म नहीं किया जा सकता, इमरजेंसी के वक्त ऐसा करने वालों को लोगों ने खत्म कर दिया।
