
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व केंद्री मंत्री रवि शंकर प्रसाद और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भाजपा मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस की। दोनों नेताओं ने सदन में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक का समर्थन न करने पर कांग्रेस और विपक्ष पर जमकर हमला बोला।
स्मृति ईरानी ने कहा, “आज राष्ट्र की महिलाओं को कांग्रेस की एक प्रेस वार्ता में 98 साल का एक एहसान जताया गया। देश की महिलाओं को ये कहा गया कि कांग्रेस पार्टी ने एक ऐसा सपना सृजित किया, जो महिलाओं को राजनीतिक अधिकार दिलाने की मंशा रखता है। 98 साल उस मंशा का क्या हश्र हुआ है, वह कल देश की संसद में देशभर की महिलाओं ने देखा। कांग्रेस पार्टी इठलाई, मुस्कुराई और उन्होंने मेज थपथपाई और इस बात का राजनीतिक जश्न मनाया कि उन्होंने देश की आम महिलाओं की राजनीतिक आकांक्षाओं को कुचला। लेकिन भाजपा के लिए, यह केवल सत्ता के लिए संघर्ष नहीं है, बल्कि समानता के अधिकार की लड़ाई है।”
स्मृति ईरानी ने कहा, “महिलाएं याद रखेंगी कि कांग्रेस के शासन के छह दशकों के दौरान देश की 11 करोड़ महिलाएं शौचालयों की सुविधा से वंचित थीं। महिलाएं याद रखेंगी कि 25 करोड़ महिलाओं को बैंक खाते खोलने के लिए आवश्यक सहयोग से वंचित रखा गया था। महिलाएं याद रखेंगी कि भाजपा-एनडीए के शासनकाल में ही पहली बार ‘जेंडर बजट फ्रेमवर्क’ की शुरुआत की गई थी।”
स्मृति ईरानी ने कहा, “कांग्रेस और उसके समर्थक दलों ने इस बात का उत्सव मनाया कि इस देश की वर्षों से काम कर रही संघर्षशील राजनीतिक महिलाएं, जो मात्र 33 फीसदी अधिकार मांग रही थीं, उनको कैसे मर्यादाएं तोड़कर उनके अधिकार से वंचित रखा जाए, संसद का संघर्ष कैसे जीता जाए, उस जश्न में कांग्रेस और उसके समर्थक दल डूबे हुए थे। भाजपा के लिए ये सत्ता का संघर्ष नहीं, समानता का अधिकार देने का प्रश्न था।”
वहीं, रविशंकर प्रसाद ने प्रियंका गांधी पर तंज कसा और उनकी बातों की निंदा की। उन्होंने कहा, “मैं आमतौर पर प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ कुछ नहीं कहता, लेकिन यह पहली बार है जब मैं ऐसा कर रहा हूं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने महिलाओं को ‘इस्तेमाल करने’ की बात कही। क्या भारत की महिलाएं कोई ऐसी वस्तु हैं, जिसका इस्तेमाल किया जाए? यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की एक महिला सांसद की भाषा है। हम इस भाषा की निंदा करते हैं।”
रविशंकर प्रसाद ने संविधान के बारे में बताते हुए कहा, “परिसीमन के बिना लोकसभा या विधानसभा में सीटों में कोई बदलाव संभव नहीं है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 81, खंड (2) के अनुसार, लोकसभा की सीटें प्रत्येक राज्य को आवंटित की जानी चाहिए, और प्रत्येक राज्य को क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों में इस तरह विभाजित किया जाना चाहिए कि पूरे देश में जनसंख्या और सीटों का अनुपात एक समान रहे। जब भी जनगणना होती है, तो दक्षिण भारत की जनसंख्या लगातार कम होती जाती है। कल अमित शाह ने घोषणा की कि जो नया संशोधन आया है, उसके तहत सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 कर दी जाएगी, ताकि लोगों को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सके। चूंकि जनगणना कराने में काफी समय लगता है, इसलिए यह कहा गया कि परिसीमन पिछली प्रकाशित जनगणना के आधार पर किया जा सकता है। परिसीमन के बिना सीटों का कोई पुनर्समायोजन संभव नहीं है।”
