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सीडीएस अनिल चौहान की इंग्लैंड यात्रा, युद्धों के बदलते स्वरूप पर की चर्चा

Apr 21, 2026

नई दिल्ली: भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक यात्रा पर हैं। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने यूके यात्रा के दौरान द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को दिशा देने वाली उच्चस्तरीय बैठकों व कार्यक्रमों में शिरकत की है।

इस दौरान उन्होंने यूके के रक्षा राज्य मंत्री ल्यूक पोलार्ड से भी मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। बैठक में आधुनिक युद्धों के बदलते स्वरूप, आधुनिक सैन्य चुनौतियों और सैन्य-से-सैन्य सहयोग को और मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। सीडीएस ने यहां इंडो-पैसिफिक मामलों की राज्य मंत्री सीमा मल्होत्रा के साथ भी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता की।

इस दौरान भारत-यूके साझेदारी, रक्षा औद्योगिक रोडमैप और प्रौद्योगिकी एवं सुरक्षा से जुड़े सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। खासतौर पर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उभरती चुनौतियों का मिलकर सामना करने के लिए दोनों पक्षों ने समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई। बैठकों में साइबर, इंटेलिजेंस और अंतरिक्ष जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया। साथ ही सूचना सुरक्षा, इंफॉर्मेशन रेजिलिएंस और विशेष प्रशिक्षण आदान-प्रदान को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई। दोनों देशों ने भविष्य के लिए तैयार, मजबूत और सक्षम सशस्त्रबलों के निर्माण के साझा संकल्प को दोहराया है।

इन महत्वपूर्ण मुलाकातों से पहले सीडीएस अनिल चौहान ने यूके में एक उच्चस्तरीय राउंडटेबल सम्मेलन का नेतृत्व भी किया। इसमें कई प्रमुख अधिकारी, थिंक टैंक्स और विशेषज्ञों शामिल हुए। राउंडटेबल सम्मेलन का विषय ‘भारतीय सैन्य परिवर्तन: चुनौतियां और अवसर’ था। इस विषय पर आयोजित चर्चा में बदलते वैश्विक रणनीतिक परिदृश्य और आधुनिक सैन्य बदलावों की आवश्यकता पर विचार-विमर्श हुआ। इसमें उन्नत तकनीकों के बढ़ते महत्व, ऑपरेशनल क्षमताओं के विस्तार और रक्षा, साइबर व इंटेलिजेंस क्षेत्रों में बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया।

अपनी यात्रा के दौरान अनिल चौहान को औपचारिक ‘सेरेमोनियल स्टेप लाइन’ सम्मान दिया गया। उनका स्वागत यूके के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ सर रिचर्ड नाइटन ने किया। उन्होंने यूके में भारत के उच्चायुक्त से भी मुलाकात की। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह यात्रा भारत और यूके के बीच रक्षा, इंटेलिजेंस, साइबर सहयोग, संयुक्त अभ्यास और रणनीतिक संवाद को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो वैश्विक सुरक्षा व स्थिरता को मजबूत करेगी।