
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के आगमन पर राज्य सरकार द्वारा किए गए व्यवहार का विषय बुधवार को राज्यसभा में उठाया गया। यहां स्पष्ट तौर पर कहा गया कि पश्चिम बंगाल की इस गुस्ताखी को माफ नहीं किया जा सकता। भाजपा सांसद ने इस मामले पर कहा कि राष्ट्रपति पद किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि सभी 140 करोड़ भारतीयों के गौरव का प्रतीक है।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति की पश्चिम बंगाल यात्रा के दौरान राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, संबंधित वरिष्ठ अधिकारी व अन्य व्यक्ति राष्ट्रपति के स्वागत और विदाई के लिए उपस्थित नहीं थे। बुधवार को यह विषय भाजपा सांसद बाबूराम निषाद ने सदन में उठाया। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य निषाद ने कहा कि वह आज एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय की ओर सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि यह विषय किसी दल या राजनीति से ऊपर है। यह विषय भारत के राष्ट्रपति की गरिमा और हमारे संविधान की आत्मा से संबंधित है। निषाद ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हाल ही में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के आगमन के दौरान जो प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ है, वह केवल एक चूक नहीं बल्कि एक संवैधानिक अपराध है। उन्होंने कहा कि यदि कोई राज्य सरकार जानबूझकर राष्ट्रपति या संवैधानिक प्रमुख के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करती है, तो उसे संवैधानिक तंत्र की विफलता मानकर अनुच्छेद 356 के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
गौरतलब है कि अनुच्छेद 356 के तहत कार्रवाई तब की जाती है जब राज्य सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुरूप काम करने में असमर्थ हो या राज्य संवैधानिक तंत्र विफल हो जाए। अनुच्छेद 356 के तहत राज्य सरकार को बर्खास्त किया जा सकता है।
बाबूराम निषाद ने राष्ट्रपति के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान राज्य सरकार के बर्ताव पर कहा कि ऐसी घटनाओं पर संबंधित राज्य के विवेकाधीन अधिकार में कटौती का प्रावधान हो। यही नहीं प्रोटोकॉल के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और मंत्रियों पर दंडनीय कार्रवाई व आपराधिक मुकदमा चलाना चाहिए।
