
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के मौके पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को लोगों से वनों के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि वन न केवल हमारे ग्रह के ‘फेफड़े’ और जैव विविधता की जीवनरेखा हैं, बल्कि अर्थव्यवस्थाओं और लोगों की भलाई के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण कारक हैं। वे लाखों लोगों की आजीविका का आधार हैं, रोजगार पैदा करते हैं, गरीबी कम करते हैं और खाद्य प्रणालियों को सुदृढ़ बनाते हैं।
उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर आइए हम अपनी वन संपदा का सम्मान करें और उसकी रक्षा करें। साथ ही, इन अमूल्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पुनरुद्धार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराएं, ताकि सभी के लिए एक अधिक हरित, समावेशी और सुदृढ़ भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।”
विश्व वानिकी दिवस हर साल 21 मार्च को मनाया जाता है। इसे 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित किया गया था। इस दिन का उद्देश्य दुनियाभर में वनों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने में उनकी भूमिका को रेखांकित करना है। हर साल इस दिवस के लिए एक विशेष थीम भी तय की जाती है, जिसे वनों पर सहयोगात्मक भागीदारी द्वारा चुना जाता है। साल 2026 की थीम ‘वन और अर्थव्यवस्थाएं’ है, जो यह दर्शाती है कि वन किस तरह आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देते हैं। लोगों की आजीविका को सहारा देते हैं और एक सतत जैव-अर्थव्यवस्था के लिए प्रकृति आधारित समाधान प्रदान करते हैं। 2025 की थीम ‘वन और भोजन’ थी, जिसमें खाद्य सुरक्षा और पोषण में वनों के योगदान पर जोर दिया गया था। 2024 में ‘वन और नवाचार’ थीम के तहत सैटेलाइट मॉनिटरिंग जैसी नई तकनीकों के जरिए वनों की कटाई रोकने के उपायों पर चर्चा की गई थी।
