
नई दिल्ली: दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार ने ‘दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2026-2030’ का ड्राफ्ट जारी किया है। चार साल की यह नीति इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को तेजी से बढ़ावा देने, हवा की गुणवत्ता सुधारने और साफ-सुथरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने पर केंद्रित है।
यह पॉलिसी भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 से प्रेरित है, जो स्वच्छ हवा और प्रदूषण मुक्त वातावरण को जीवन के अधिकार का हिस्सा मानती है। साथ ही, एमसी मेहता बनाम भारत संघ के फैसले और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 व मोटर वाहन अधिनियम, 1988 जैसे कानूनों का भी इसमें आधार लिया गया है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में सर्दियों के दौरान 23 प्रतिशत प्रदूषण के लिए वाहन जिम्मेदार हैं। खास बात यह है कि दोपहिया वाहन कुल वाहनों का करीब 67 प्रतिशत हैं, इसलिए इन्हें तेजी से इलेक्ट्रिक में बदलना बेहद जरूरी माना गया है। इसके अलावा तीन पहिया, कमर्शियल कार, और छोटे मालवाहक वाहन (एन1) भी ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं।
इस नीति के मुख्य उद्देश्य सभी वाहन वर्गों में ईवी अपनाने को बढ़ावा देना, चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करना, बैटरी रीसाइक्लिंग सिस्टम विकसित करना और पेट्रोल-डीजल वाहनों पर निर्भरता कम करना हैं।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति बैटरी कलेक्शन सेंटर बनाने और सुरक्षित निपटान के लिए नियम तय करेगा। बैटरी ट्रैकिंग सिस्टम भी विकसित किया जाएगा ताकि रीसाइक्लिंग और दोबारा उपयोग सुरक्षित तरीके से हो सके।
1 जनवरी 2027 से केवल इलेक्ट्रिक तीन पहिया ही रजिस्टर होंगे। 1 अप्रैल 2028 से केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया ही रजिस्टर किए जाएंगे। स्कूल बसों में भी ईवी का हिस्सा बढ़ाना अनिवार्य होगा। पहले 2 साल में 10 प्रतिशत, तीसरे साल 20 प्रतिशत, और 2030 तक 30 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य है।
सरकारी विभागों में नई खरीदी जाने वाली सभी गाड़ियां इलेक्ट्रिक होंगी। दिल्ली परिवहन निगम की नई बसें भी इलेक्ट्रिक होंगी। वहीं, डिलीवरी और फ्लीट कंपनियों को 2026 से पेट्रोल-डीजल वाहनों को शामिल करने से रोका जाएगा। पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाया जाएगा। ट्रांसपोर्ट विभाग इस नीति को लागू करेगा और एक विशेष ईवी सेल बनाया जाएगा।
यह पॉलिसी दिल्ली को प्रदूषण मुक्त और आधुनिक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में तेजी से आगे ले जाने की बड़ी कोशिश मानी जा रही है।
